Sunday, February 27, 2022

युद्ध कब शांति का विकल्प रहे हैं



 रात युक्रेन के लिए बेहद डरावनी बीतेगी यही समाचार सुनते-सुनते सो गई थी, मुझसे वहाँ के नागरिकों के आँसू देखे नहीं जा रहे थे, न सुबह समाचार देखने का ही मन हुआ।लेकिन कब तक हम इन्हीं सब दुखदाई पलों से भागते रहेंगे?

आपको याद न हो तो बता देती हूँ आज ही के दिन एक भीषण अग्निकांड हुआ था।जी हां गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस की एक पूरी की पूरी बोगी जला दी गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई। ये वही लोग थे जो अयोध्या से लौट रहे थे। इसके बाद वही हुआ जो होता आया है,सांप्रदायिक दंगे, जानमाल का नुकसान।

आम जनता से पूछिए तो युद्ध कब शांति का विकल्प रहे हैं, युद्ध से कभी मसले हल नहीं हुए हैं। मगर युद्ध होते रहे हैं।दुआ करें यह युद्ध जल्दी समाप्त हो जाए।

हर युद्ध में हज़ारों देशभक्त शहीद हो जाते हैं कल रात युक्रेन के एक शहीद विटाली का चेहरा भी देखा जिसने पुल को उड़ाने के लिए स्वयं का बलिदान कर दिया, और मुझे यह भी याद आया कि...

आज ही के दिन आज़ादी के दीवाने चंद्रशेखर आज़ाद ने अंग्रेजों की गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को गोली मार ली थी।

 एक युद्ध यह भी था।

देशभक्ति को नमन। देशभक्तों को नमन।

सुनीता शानू

9 comments:

  1. जब जब धर्म की हानि होगी, अधर्मियों का संहार होगा। यही गीता का सार है।

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    1. सत्ता के प्रसार का युद्ध कब धर्म अधर्म का रहा। आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद।

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  2. निश्चित ही युद्ध कभी भी शांति के विकल्प नहीं रहें।आपको पढ़ना बेहद आत्मीय लगता है।

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  3. बहुत धन्यवाद ललित जी

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  4. बेहद संवेदनशील ब्लॉग लिखा है। हार्दिक बधाई

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  5. आपकी संवेदनशीलता और आजाद की स्मृति को नमन।

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  6. वाह बहुत ही सुंदर लेख है सुनीता जी
    युद्ध का विलोम शब्द शांति नही हो सकता तो फिर हर युद्ध शांति के लिए लड़े जाते है कैसे सत्य हो सकता है?
    आपके लेख में तथ्य है अति भावुक शब्द रचना से प्रभावित लेख। अपार बधाई और अभिवादन।

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  7. युद्ध विकल्प नहीं है। हम ससब शांतिप्रिय लोग हैं। लेकिन यूक्रेन जो सामूहिक हत्याएं कर रहा है, वह भी उचित नहीं। पुतिन की बदले कि कार्यवाही की भी आलोचना होनी चाहिए।

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  8. गृहस्थी चलाना भी किसी युद्ध से कम है क्या?

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